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Lyrics

02 MERA TERA MANWA.mp3


Album: KAHEN KABIR II (2006)

मेरा तेरा मनुआ

मेरा तेरा मनुआँ कैसे इस होई रे।
मैं कहता हूँ आँखिन देखी, तू कहता कागद की देखी।

मैं कहता सुरक्षावनहारी, तू राख्यो उरझाई रे।
मैं कहता तू जागत रहियो, तू रहता है सोई रे।

मैं कहता निर्मोही रहियो, तू जाता है मोही रे।
जुगन-जुगन समझावत हारा कहीं मानत है कोई रे।

सतगुरू धारा निर्मल बाहें, वा मैं काया धोई रे।
कहत कबीर सुनो भाई साधो, तब ही वैसा होई रे।।

मेरा तेरा मनुआ - विवरण
संत कबीर जो पूर्ण प्राप्त देह धारी थे, अपूर्ण मानव के अंतर में असंतुलन का वर्णन कर रहे हैं। अपूर्ण को परिपूर्ण बनाने के लिए प्रस्तुत भजन में, कबीर जी ने यह सुझाव रखा है, कि मानव को अपनी जागृति और निर्मोहिता की ओर ध्यान देना चाहिए। सद्गुरू की धारणा में ही इस काया की निर्मलता प्राप्त हैं। तब ही गुरूपद दर्शन का प्रमाण मिलेगा।


TRANSLATION

How can your and my mind become one. I talk of what I actually see happening whilst you talk of what is written in books. I say things that straighten matters, whilst you continue to entangle them. I talk of an awakened state whilst you prefer to sleep. I say, you must be detached, but you continue to remain attached. Says Kabir, ‘O dear one’, Satguru is none other than a divine flow of purity where all sins are washed away and you merge in this flow becoming one with the Satguru himself.